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स्वागत योग्य कदम

कई भारतीय कंपनियां इसे बैन पर टिकटोक ने क्या कहाभारत सरकार का स्वागत योग्य कदम बता रही हैं. टिकटॉक से प्रतिस्पर्धा में रहने वाले वीडियो चैट ऐप रोपोसो की मालिकाना कंपनी इनमोबी ने कहा कि ये कदम उसके प्लेटफॉर्म के लिए बाज़ार को खोल देगा. वहीं भारतीय सोशल नेटवर्क शेयरचैट ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है.

 

चाइनीज ऐप पर बैन से चीनी मीडिया को लगी मिर्ची

चीनी ऐप बंद होने पर चीनी सरकार ने भले ही अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हो, लेकिन चीन की सरकारी मीडिया (ग्लोबल टाइम्स) ने भारत के कदम को अमेरिका की नकल करने वाला करार दिया है. चीनी अखबार ने कहा है कि चीन की वस्तुओं के बहिष्कार के लिए भारत भी अमेरिका जैसे ही बहाने ढूंढ रहा है.अखबार ने आरोप लगाया है कि चीन से मालवेयर, ट्रोजन हॉर्स और राष्ट्रीय सुरक्षा का ख़तरा बताकर इस तरह के प्रतिबन्ध लगाए गए हैं. अख़बार के मुताबिक अमेरिका ने भी राष्ट्रवाद की आड़ में इसी तरह चीन के सामानों को निशाना बनाना शुरू किया था. चीनी मीडिया ने फिर दोहराया है कि इस तरह के क़दमों से भारत की अर्थव्यवस्था को ही नुकसान होगा.

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भारत सबसे बड़ा ऐप बाजार

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास स्मार्टफोन हैं. बीते साल दुनियाभर में सबसे ज्यादा एप भारत में इंस्टॉल किए गए थे. आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती तीन महीने में ही 4.5 अरब से ज्यादा ऐप डाउनलोड किए गए, जिनमें सबसे ज्यादा टिकटोक था. अब भारत सरकार ने सोमवार को चीन के 59 चर्चित एप पर प्रतिबंध लगाकर चीन के नापाक इरादों को जवाब देने के लिए वर्चुअल स्ट्राइक की है. टिकटोक की बात करें तो दुनियाभर में इसके दो अरब से ज्यादा यूजर हैं. इनमें सबसे ज्यादा करीब 30 फीसदी भारतीय हैं. इसके बाद चीन और अमेरिका में इसके यूजर हैं. इस ऐप की कुल कमाई का 10 फीसदी केवल भारत से होता है.

क्यों दिख रहे हैं ये चाइनीज ऐप्स?

सरकार ने इन ऐप को प्रतबंधित तो कर दिया, लेकिन मंगलवार सुबह तक ये ऐप गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद हैं. यानी इन ऐप्स को कोई व्यक्ति अपने स्मार्टफोन पर डाउनलोड कर सकता था. जब हमने मंगलवार सुबह प्रतिबंधित ऐप की सूची में शामिल यूसी ब्राउजर को डाउनलोड करना चाहा तो ये ऐप आसानी से डाउनलोड होकर मोबाइल में इंस्टॉल भी हो गया. बता दें कि सरकार द्वारा इन ऐप्स को प्रतिबंधित करने के बाद इसकी सूचना एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्म को दी जाती है. सरकार के इस निर्देश पर अमल करने में कंपनियां कुछ समय लेती हैं और इसके बाद इन्हें ऐप प्लेटफॉर्म से हटाया जाता है.

 

सोशल मीडिया पर सवालों की बौछार

विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मस पर यूजर्स अब लगातार ये सवाल पूछ रहे हैं कि ये किस तरह का बैन है और ये बैन कब से प्रभावी होगा, क्योंकि ऐप तो अब भी काम कर रहे हैं और ये अब तक प्ले स्टोर और ऐप स्टोर में डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं तो फिर इसे कैसे बैन कहा जाए.

डिजिटल एयर स्ट्राइक

भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए टिकटॉक, वीचैट, यूसी ब्राउजर जैसे 59 चीनी एप्स पर एक तरह से ‘डिजिटल एयर स्ट्राइक’ कर दी है. सरकार के इस फैसले के साथ ही सोशल मीडिया पर मीम्स की भी बाढ़ आ गई है. लोग इस पर खूब मजेदार मीम्स शेयर कर रहे हैं. ज्यादातर यूजर्स ने इसे केंद्र सरकार की ओर से लिया गया सही फैसला बताया है.

 

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कई भारतीय कंपनियां इसे बैन पर टिकटोक ने क्या कहाभारत सरकार का स्वागत योग्य कदम बता रही हैं. टिकटॉक से प्रतिस्पर्धा में रहने वाले वीडियो चैट ऐप रोपोसो की मालिकाना कंपनी इनमोबी ने कहा कि ये कदम उसके प्लेटफॉर्म के लिए बाज़ार को खोल देगा. वहीं भारतीय सोशल नेटवर्क शेयरचैट ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है.

 

चाइनीज ऐप पर बैन से चीनी मीडिया को लगी मिर्ची

चीनी ऐप बंद होने पर चीनी सरकार ने भले ही अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हो, लेकिन चीन की सरकारी मीडिया (ग्लोबल टाइम्स) ने भारत के कदम को अमेरिका की नकल करने वाला करार दिया है. चीनी अखबार ने कहा है कि चीन की वस्तुओं के बहिष्कार के लिए भारत भी अमेरिका जैसे ही बहाने ढूंढ रहा है.अखबार ने आरोप लगाया है कि चीन से मालवेयर, ट्रोजन हॉर्स और राष्ट्रीय सुरक्षा का ख़तरा बताकर इस तरह के प्रतिबन्ध लगाए गए हैं. अख़बार के मुताबिक अमेरिका ने भी राष्ट्रवाद की आड़ में इसी तरह चीन के सामानों को निशाना बनाना शुरू किया था. चीनी मीडिया ने फिर दोहराया है कि इस तरह के क़दमों से भारत की अर्थव्यवस्था को ही नुकसान होगा.

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रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास स्मार्टफोन हैं. बीते साल दुनियाभर में सबसे ज्यादा एप भारत में इंस्टॉल किए गए थे. आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती तीन महीने में ही 4.5 अरब से ज्यादा ऐप डाउनलोड किए गए, जिनमें सबसे ज्यादा टिकटोक था. अब भारत सरकार ने सोमवार को चीन के 59 चर्चित एप पर प्रतिबंध लगाकर चीन के नापाक इरादों को जवाब देने के लिए वर्चुअल स्ट्राइक की है. टिकटोक की बात करें तो दुनियाभर में इसके दो अरब से ज्यादा यूजर हैं. इनमें सबसे ज्यादा करीब 30 फीसदी भारतीय हैं. इसके बाद चीन और अमेरिका में इसके यूजर हैं. इस ऐप की कुल कमाई का 10 फीसदी केवल भारत से होता है.

क्यों दिख रहे हैं ये चाइनीज ऐप्स?

सरकार ने इन ऐप को प्रतबंधित तो कर दिया, लेकिन मंगलवार सुबह तक ये ऐप गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद हैं. यानी इन ऐप्स को कोई व्यक्ति अपने स्मार्टफोन पर डाउनलोड कर सकता था. जब हमने मंगलवार सुबह प्रतिबंधित ऐप की सूची में शामिल यूसी ब्राउजर को डाउनलोड करना चाहा तो ये ऐप आसानी से डाउनलोड होकर मोबाइल में इंस्टॉल भी हो गया. बता दें कि सरकार द्वारा इन ऐप्स को प्रतिबंधित करने के बाद इसकी सूचना एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्म को दी जाती है. सरकार के इस निर्देश पर अमल करने में कंपनियां कुछ समय लेती हैं और इसके बाद इन्हें ऐप प्लेटफॉर्म से हटाया जाता है.

 

सोशल मीडिया पर सवालों की बौछार

विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मस पर यूजर्स अब लगातार ये सवाल पूछ रहे हैं कि ये किस तरह का बैन है और ये बैन कब से प्रभावी होगा, क्योंकि ऐप तो अब भी काम कर रहे हैं और ये अब तक प्ले स्टोर और ऐप स्टोर में डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं तो फिर इसे कैसे बैन कहा जाए.

डिजिटल एयर स्ट्राइक

भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए टिकटॉक, वीचैट, यूसी ब्राउजर जैसे 59 चीनी एप्स पर एक तरह से ‘डिजिटल एयर स्ट्राइक’ कर दी है. सरकार के इस फैसले के साथ ही सोशल मीडिया पर मीम्स की भी बाढ़ आ गई है. लोग इस पर खूब मजेदार मीम्स शेयर कर रहे हैं. ज्यादातर यूजर्स ने इसे केंद्र सरकार की ओर से लिया गया सही फैसला बताया है.

 

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बैन के बाद गूगल प्ले-स्टोर और एपल ऐप स्टोर से TikTok गायब

बैन के बाद गूगल प्ले-स्टोर और एपल ऐप स्टोर से TikTok गायब

  2020-06-30 11:17 am


दिल्ली । केंद्र सरकार द्वारा बैन लगाने के 12 घंटे के भीतर भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय एप टिकटोक गूगल प्ले-स्टोर और एपल के स्टोर से हटा दिया गया है. मंगलवार सुबह तक टिकटोक ऐप दोनों स्टोर्स पर मौजूद था मगर अब यह दिखाई नहीं दे रहा है.प्ले-स्टोर पर सर्च करने पर टिकटोक से मिलते जुलते कई नाम के ऐप्स नजर आ रहे हैं.

चाइनीज ऐप बंद करने पर टिकटोक के भारत प्रमुख ने क्या कहा

भारत में चाइनीज ऐप बैन होने पर टिकटोक के भारत प्रमुख निखिल गांधी ने ट्विटर पर लिखा- आदेश हम मान रहे हैं. और साथ ही सरकारी एजेंसियों से भी मिल रहे हैं ताकि अपना जवाब और अपनी सफाई दे सकें. उन्होंने कहा है कि टिकटोक भारत के कानून का सम्मान करता है. और टिकटोक ने भारत के लोगों का डाटा न तो चीनी सरकार को और न ही किसी और देश की सरकार को भेजा है. अगर हमसे ऐसा करने को कहा भी जाता है, तो भी हम नहीं करेंगे. आगे कहा कि टिककोट ने इंटरनेट को और लोकतांत्रिक बनाया है. 14 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है. और इस पर लाखों-करोड़ों लोग जिनमें कलाकार, किस्सागो, शिक्षक भी हैं .अपनी रोजी के लिए निर्भर हैं. कम्पनी का दावा है कि इनमें से बहुत सारे लोग पहली बार के इंटरनेट यूजर हैं.

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भारत सबसे बड़ा ऐप बाजार

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास स्मार्टफोन हैं. बीते साल दुनियाभर में सबसे ज्यादा एप भारत में इंस्टॉल किए गए थे. आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती तीन महीने में ही 4.5 अरब से ज्यादा ऐप डाउनलोड किए गए, जिनमें सबसे ज्यादा टिकटोक था. अब भारत सरकार ने सोमवार को चीन के 59 चर्चित एप पर प्रतिबंध लगाकर चीन के नापाक इरादों को जवाब देने के लिए वर्चुअल स्ट्राइक की है. टिकटोक की बात करें तो दुनियाभर में इसके दो अरब से ज्यादा यूजर हैं. इनमें सबसे ज्यादा करीब 30 फीसदी भारतीय हैं. इसके बाद चीन और अमेरिका में इसके यूजर हैं. इस ऐप की कुल कमाई का 10 फीसदी केवल भारत से होता है.

क्यों दिख रहे हैं ये चाइनीज ऐप्स?

सरकार ने इन ऐप को प्रतबंधित तो कर दिया, लेकिन मंगलवार सुबह तक ये ऐप गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद हैं. यानी इन ऐप्स को कोई व्यक्ति अपने स्मार्टफोन पर डाउनलोड कर सकता था. जब हमने मंगलवार सुबह प्रतिबंधित ऐप की सूची में शामिल यूसी ब्राउजर को डाउनलोड करना चाहा तो ये ऐप आसानी से डाउनलोड होकर मोबाइल में इंस्टॉल भी हो गया. बता दें कि सरकार द्वारा इन ऐप्स को प्रतिबंधित करने के बाद इसकी सूचना एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्म को दी जाती है. सरकार के इस निर्देश पर अमल करने में कंपनियां कुछ समय लेती हैं और इसके बाद इन्हें ऐप प्लेटफॉर्म से हटाया जाता है.

 

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भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए टिकटॉक, वीचैट, यूसी ब्राउजर जैसे 59 चीनी एप्स पर एक तरह से ‘डिजिटल एयर स्ट्राइक’ कर दी है. सरकार के इस फैसले के साथ ही सोशल मीडिया पर मीम्स की भी बाढ़ आ गई है. लोग इस पर खूब मजेदार मीम्स शेयर कर रहे हैं. ज्यादातर यूजर्स ने इसे केंद्र सरकार की ओर से लिया गया सही फैसला बताया है.

 

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